The Deteriorating Condition Of The Family Members In Submitting The Sample Of The Admitted Patients – भर्ती मरीजों का जांच का नमूना जमा करने में परिजनों की बिगड़ रही हालत

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चंडीगढ़। पीजीआई भार्गव सभागार के सामने स्थित कमरा नंबर- 117 के सैंपल कलेक्शन सेंटर के बाहर मंगलवार को दोपहर एक बजे लंबी कतार लगी थी। लाइन में खड़े किसी व्यक्ति का मरीज ट्रामा में भर्ती था तो कोई इमरजेंसी में भर्ती अपने मरीज का जांच का नमूना जमा करने के लिए घंटों से वहां लाइन में खड़ा था। पूछने पर पता चला कि एक-एक नमूना 25 से 30 मिनट में लिया जा रहा है। सुबह 9 बजे से लाइन में लगने के बावजूद 12 बजे तक नंबर नहीं आया था। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि नमूना लेने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि आठ से दस जगह उसकी डिटेल भरनी पड़ती है। इस कारण विलंब हो रहा है।
वहां लाइन में लगे मरीजों के परिजनों को इस बात की चिंता सता रही थी कि कहीं उसके मरीज को किसी चीज की जरूरत पड़ी तो वे किससे मांगेगा या फिर कोई परेशानी हुई तो कौन सुनेगा। वहां खड़े-खड़े परिजनों का ठंड में पसीने छूट रहे थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही थी। परिजनों का कहना है कि पीजीआई जैसे संस्थान में भर्ती मरीजों का जांच का नमूना लेने की व्यवस्था का न होना दु:खद है। पीजीआई प्रशासन को इसे लेकर गंभीर होना चाहिए।
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कोरोना से पहले वार्ड में होता था कलेक्शन
कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना के पहले बी ब्लॉक में सैंपल जमा होते थे। इमरजेंसी, ट्रामा और अन्य वार्र्डों से वार्ड अटेंडेंट नमूनों को वहां लाकर जमा करता था, जिसे वार्ड में रेजीडेंट डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ निकालते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा। कमरा नंबर- 117 में प्रतिदिन कम से कम 700 से 800 नमूने जमा किए जा रहे हैं।
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सैकड़ों की भीड़, चंद कर्मचारी
सैंपल कलेक्शन सेंटर में तीन काउंटर संचालित किए जा रहे हैं, जिसमें शुल्क, सैंपल और रिपोर्टिंग के लिए 2-2 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुल्क काउंटर पर कर्मचारियों की संख्या और बढ़ाई जानी चाहिए, क्योंकि उन्हें फार्म में अलग-अलग विभाग की डिटेल, सीआर नंबर और जांच का नाम भरने में काफी समय लग रहा है। इससे मरीज और उनके परिजनों की फजीहत हो रही है।
कोट-
कोरोना के बाद अचानक मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया है। कलेक्शन विंडों पर भीड़ की जानकारी हमें हैं, उसे कम करने का उपाय तलाशा जा रहा है। जल्द ही वहां भीड़ कम के लिए अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
-प्रो. सुरजीत सिंह, प्रभारी निदेशक पीजीआई

चंडीगढ़। पीजीआई भार्गव सभागार के सामने स्थित कमरा नंबर- 117 के सैंपल कलेक्शन सेंटर के बाहर मंगलवार को दोपहर एक बजे लंबी कतार लगी थी। लाइन में खड़े किसी व्यक्ति का मरीज ट्रामा में भर्ती था तो कोई इमरजेंसी में भर्ती अपने मरीज का जांच का नमूना जमा करने के लिए घंटों से वहां लाइन में खड़ा था। पूछने पर पता चला कि एक-एक नमूना 25 से 30 मिनट में लिया जा रहा है। सुबह 9 बजे से लाइन में लगने के बावजूद 12 बजे तक नंबर नहीं आया था। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि नमूना लेने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि आठ से दस जगह उसकी डिटेल भरनी पड़ती है। इस कारण विलंब हो रहा है।

वहां लाइन में लगे मरीजों के परिजनों को इस बात की चिंता सता रही थी कि कहीं उसके मरीज को किसी चीज की जरूरत पड़ी तो वे किससे मांगेगा या फिर कोई परेशानी हुई तो कौन सुनेगा। वहां खड़े-खड़े परिजनों का ठंड में पसीने छूट रहे थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही थी। परिजनों का कहना है कि पीजीआई जैसे संस्थान में भर्ती मरीजों का जांच का नमूना लेने की व्यवस्था का न होना दु:खद है। पीजीआई प्रशासन को इसे लेकर गंभीर होना चाहिए।

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कोरोना से पहले वार्ड में होता था कलेक्शन

कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना के पहले बी ब्लॉक में सैंपल जमा होते थे। इमरजेंसी, ट्रामा और अन्य वार्र्डों से वार्ड अटेंडेंट नमूनों को वहां लाकर जमा करता था, जिसे वार्ड में रेजीडेंट डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ निकालते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा। कमरा नंबर- 117 में प्रतिदिन कम से कम 700 से 800 नमूने जमा किए जा रहे हैं।

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सैकड़ों की भीड़, चंद कर्मचारी

सैंपल कलेक्शन सेंटर में तीन काउंटर संचालित किए जा रहे हैं, जिसमें शुल्क, सैंपल और रिपोर्टिंग के लिए 2-2 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुल्क काउंटर पर कर्मचारियों की संख्या और बढ़ाई जानी चाहिए, क्योंकि उन्हें फार्म में अलग-अलग विभाग की डिटेल, सीआर नंबर और जांच का नाम भरने में काफी समय लग रहा है। इससे मरीज और उनके परिजनों की फजीहत हो रही है।

कोट-

कोरोना के बाद अचानक मरीजों का दबाव काफी बढ़ गया है। कलेक्शन विंडों पर भीड़ की जानकारी हमें हैं, उसे कम करने का उपाय तलाशा जा रहा है। जल्द ही वहां भीड़ कम के लिए अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।

-प्रो. सुरजीत सिंह, प्रभारी निदेशक पीजीआई


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