Supporters of anti-China fighters, many radicals linked to ISIS-K | चीन विरोधी लड़ाकों के हिमायती कई कट्टरपंथी आईएसआईएस-के से जुड़े


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तालिबान अब स्पष्ट रूप से बिखर रहा है। संगठन जब चीन से हमदर्दी पाने की कोशिश कर रहा है, उनके पैदल सैनिक और फील्ड कमांडर अशांत झिंजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र (एक्सयूएआर) में उइगर और अन्य मुसलमानों के उत्पीड़न का हवाला देते हुए चीनी सरकार के खिलाफ जिहाद का आह्वान कर रहे हैं।

वे शीर्ष तालिबान नेतृत्व पर अपने शिनजियांग मुस्लिम भाइयों का बचाव नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं, जो चीन में बंद हैं। वे पिछले महीने एक कुरान ऐप को ब्लॉक करने खातिर चीन से भी नाराज हैं। यह ऐप दुनिया भर के 2.5 करोड़ से अधिक मुसलमानों का भरोसेमंद है और वे इसका उपयोग रोजाना नमाज के दौरान कुरान का पाठ पढ़ने या सुनने के लिए करते हैं और मक्का मदीना से हज की रस्मों का लाइव कवरेज देखते हैं।

एक इराकी समाचार वेबसाइट अलमशरक डॉट कॉम के अनुसार, ये तालिबान लड़ाके फासीवादी शासन के खिलाफ आवाज उठकर मुसलमानों को चीनी सरकार के अत्याचार से आजाद कराने के लिए इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसआईएस-के) में शामिल हो गए हैं।

अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में तालिबान के एक फील्ड कमांडर मोहजेर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, चीन खुले तौर पर गुणों और पवित्रताओं का अपमान कर रहा है और अपनी मुस्लिम आबादी पर मुकदमा चला रहा है। चीनी सरकार के खिलाफ जिहाद का समय आ गया है। हम चीनी कम्युनिस्ट शासन को दबाने के लिए जब तक बल का प्रयोग नहीं करेंगे, यह सरकार देश की मुस्लिम आबादी पर अत्याचार करना बंद नहीं करेगी।

वेबसाइट के अनुसार, अधिकांश तालिबान लड़ाकों ने भी यही भावनाएं साझा की हैं। उन्होंने कहा कि चीन मुसलमानों का दुश्मन है, लेकिन तालिबान सरकार खुलेआम नकदी पाने के लिए चीनी सरकार को रिझा रही है।

तालिबान के एक अन्य लड़ाके उमर मुतासिम कहते हैं, जिस सरकार के हाथ मुस्लिम खून से सने हों, उसके साथ दोस्ती और अंतरंगता की मनाही है।

हालांकि चीन ने अभी तक तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है, लेकिन वह तालिबान से जुड़ा हुआ है और दुनिया को तालिबान को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रेरित कर रहा है। चीन उइगर बहुल शिनजियांग क्षेत्र में उग्रवाद से चिंतित है।

ईस्ट तुर्कमेनिस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम) एक उइगर इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन है जो बदख्शां प्रांत के चीन-अफगानिस्तान सीमा क्षेत्रों से संचालित होता है। इसके बारे में कहा जाता है कि इसमें अभी भी 2000 से अधिक लड़ाके हैं। तालिबान को अपने समर्थन के बदले में चीन ने संगठन से आश्वासन मांगा कि वह ईटीआईएम को अफगानिस्तान से संचालित नहीं होने देगा। तालिबान ने अब चीन से कहा है कि ईटीआईएम के गुर्गो को चीन में धकेल दिया गया, जहां उसके सुरक्षा बल विद्रोहियों से निपट सकते हैं।

अफगान विशेषज्ञों के अनुसार, आईएसआईएस-के इस क्षेत्र में उइगरों के लिए वास्तविक आवाज बनकर लाभ उठाना चाहता है।

(यह सामग्री इंडियानैरेटिव डॉट कॉम के साथ एक व्यवस्था के तहत प्रस्तुत है)

–इंडियानैरेटिव

(आईएएनस)


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