Students’ Activity Increased In Lalsingi School – लालसिंगी स्कूल में विद्यार्थियों की चहल-पहल बढ़ी

राजकीय प्राथमिक स्कूल लालसिंगी में पढ़ाई करते बच्चे। -संवाद
– फोटो : Una

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ऊना। स्थान : राजकीय प्राथमिक पाठशाला लाल सिंगी। समय सुबह साढ़े 10 बजे। पुराने होशियारपुर रोड पर स्थित इस स्कूल में बच्चे कक्षाओं से बाहर धूप में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।
दूसरी कक्षा में एक अध्यापिका बच्चों का होमवर्क चेक करने में व्यस्त है। ज्यादातर बच्चे में मास्क पहनकर बैठे हुए हैं, लेकिन उचित शारीरिक दूरी की कमी साफ दिख रही है। कुछ बच्चे पानी पीने या एक दूसरे से बातचीत के दौरान मास्क और शारीरिक दूरी का नियम भूल गए। वहीं दूसरी कक्षा की एक बच्ची बिना मास्क के ही स्कूल आई हुई है। मास्क न पहनने को लेकर पूछे जाने पर उसने कहा कि माता-पिता ने मास्क खरीदकर नहीं दिया।
इसके बाद मुख्य अध्यापिका ने कार्यालय से एक नया मास्क लाकर उस बच्ची को पहनाया। स्कूल में पढ़ाई कर रहे ज्यादातर बच्चे प्रवासी मजदूरों के हैं। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे 15 नवंबर से पहली बार स्कूल में पहुंचे। कई बच्चे तो ऐसे भी दिखे जिन्हें अभी ठीक से लिखना भी नहीं आ रहा। वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि दस दिन पहले पहली बार स्कूल आए और घर में माता-पिता अनपढ़ हैं। कोरोना काल में उन्हें घर में सिखाने और समझाने वाला कोई नहीं था।
स्कूल की छात्रा अमरावती ने बताया कि लॉकडाउन में उन्हें पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। माता-पिता मजदूरी के लिए बाहर चले जाते थे और घर में फोन नहीं था। इस वजह से ऑनलाइन पढ़ाई एक तरह से रुक गई। हालांकि, स्कूल अध्यापिकाओं ने उन्हें कापी पर होमवर्क लिखकर दिया। इससे उन्हें काफी मदद मिली। स्कूल में सात शिक्षिका हैं और उनके सामने बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने से लेकर कोविड एसओपी का पालन करवाने जैसी तमाम चुनौतियां नजर आ रही हैं।
स्कूल की मुख्य अध्यापिका अविनाश कुमारी ने बताया कि स्कूल में कुल 224 बच्चे हैं और आज उनमें से 155 पहुंचे हैं। इन बच्चों में केवल एक स्थानीय और बाकी सभी प्रवासी मजदूरों के हैं। उन्होंने माना कि कोविड की वजह से बच्चों की पढ़ाई काफी हद तक प्रभावित हुई है। अब स्कूल खुले हैं तो बच्चों को लिखने और पढ़ने से जुड़ी समस्या आ रही है।

लालसिंग प्राथमिक स्कूल में पढ़ाई करते प्रवासी बच्चे। -संवाद

लालसिंग प्राथमिक स्कूल में पढ़ाई करते प्रवासी बच्चे। -संवाद– फोटो : Una

ऊना। स्थान : राजकीय प्राथमिक पाठशाला लाल सिंगी। समय सुबह साढ़े 10 बजे। पुराने होशियारपुर रोड पर स्थित इस स्कूल में बच्चे कक्षाओं से बाहर धूप में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।

दूसरी कक्षा में एक अध्यापिका बच्चों का होमवर्क चेक करने में व्यस्त है। ज्यादातर बच्चे में मास्क पहनकर बैठे हुए हैं, लेकिन उचित शारीरिक दूरी की कमी साफ दिख रही है। कुछ बच्चे पानी पीने या एक दूसरे से बातचीत के दौरान मास्क और शारीरिक दूरी का नियम भूल गए। वहीं दूसरी कक्षा की एक बच्ची बिना मास्क के ही स्कूल आई हुई है। मास्क न पहनने को लेकर पूछे जाने पर उसने कहा कि माता-पिता ने मास्क खरीदकर नहीं दिया।

इसके बाद मुख्य अध्यापिका ने कार्यालय से एक नया मास्क लाकर उस बच्ची को पहनाया। स्कूल में पढ़ाई कर रहे ज्यादातर बच्चे प्रवासी मजदूरों के हैं। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे 15 नवंबर से पहली बार स्कूल में पहुंचे। कई बच्चे तो ऐसे भी दिखे जिन्हें अभी ठीक से लिखना भी नहीं आ रहा। वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि दस दिन पहले पहली बार स्कूल आए और घर में माता-पिता अनपढ़ हैं। कोरोना काल में उन्हें घर में सिखाने और समझाने वाला कोई नहीं था।

स्कूल की छात्रा अमरावती ने बताया कि लॉकडाउन में उन्हें पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। माता-पिता मजदूरी के लिए बाहर चले जाते थे और घर में फोन नहीं था। इस वजह से ऑनलाइन पढ़ाई एक तरह से रुक गई। हालांकि, स्कूल अध्यापिकाओं ने उन्हें कापी पर होमवर्क लिखकर दिया। इससे उन्हें काफी मदद मिली। स्कूल में सात शिक्षिका हैं और उनके सामने बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने से लेकर कोविड एसओपी का पालन करवाने जैसी तमाम चुनौतियां नजर आ रही हैं।

स्कूल की मुख्य अध्यापिका अविनाश कुमारी ने बताया कि स्कूल में कुल 224 बच्चे हैं और आज उनमें से 155 पहुंचे हैं। इन बच्चों में केवल एक स्थानीय और बाकी सभी प्रवासी मजदूरों के हैं। उन्होंने माना कि कोविड की वजह से बच्चों की पढ़ाई काफी हद तक प्रभावित हुई है। अब स्कूल खुले हैं तो बच्चों को लिखने और पढ़ने से जुड़ी समस्या आ रही है।

लालसिंग प्राथमिक स्कूल में पढ़ाई करते प्रवासी बच्चे। -संवाद

लालसिंग प्राथमिक स्कूल में पढ़ाई करते प्रवासी बच्चे। -संवाद– फोटो : Una


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