Religious Trust Board Decision Makes Registration Of All Temples Mandatory And They Will Have To Pay 4 Percent Tax – बड़ा फैसला: बिहार में अब सभी मंदिरों को कराना होगा पंजीकरण, चार फीसदी टैक्स भी चुकाना होगा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 29 Nov 2021 06:40 PM IST

सार

बिहार में अब सभी मंदिरों को अपना पंजीकरण कराना होगा और साथ ही साथ चार फीसदी की दर से टैक्स भी चुकाना होगा। प्रदेश के धार्मिक न्यास बोर्ड ने यह फैसला लिया है। बोर्ड एक दिसंबर से पंजीकरण के लिए विशेष अभियान भी चलाने जा रहा है।

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : पेक्सेल्स

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बिहार के धार्मिक न्यास बोर्ड ने प्रदेश में मंदिरों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब सभी सार्वजनिक मंदिरों को अपना पंजीकरण कराना होगा और कर भी चुकाना होगा। मंदिरों के लिए कर की दर चार फीसदी तय की गई है। इसके दायरे में वो मंदिर भी आएंगे जिसे किसी व्यक्ति ने अपने घर में बनवाया होगा और सबके लिए खुला होगा। 

बोर्ड ने मंदिरों के पंजीकरण के लिए एक दिसंबर के एक विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है। बोर्ड से राज्य के सभी जिले के कलेक्टरों से बिना पंजीकरण संचालित हो रहे सभी मंदिरों की जानकारी मांगी है। बोर्ड के अनुसार जैसे ही जिलों से ऐसे मंदिरों की जानकारी मिल जाएगी पंजीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा।

भोजपुर जिले ने उपलब्ध कराई मंदिरों की जानकारी
भोजपुर जिले के कलेक्टर ने ऐसे मंदिरों की जानकारी उपलब्ध करा दी है। बोर्ड के सदस्य और महंत विजय शंकर गिरि ने कहा कि स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है कि सभी मंदिर जहां लोग प्रार्थना करने जाते हैं है वह पूजा का सार्वजनिक स्थान माना जाएगा। फिर भले ही वह मंदिर किसी घर में ही क्यों न हो। ऐसे सभी मंदिरों को कर देना होगा।

बिहार में केवल 4600 मंदिरों का ही हुआ पंजीकरण
धार्मिक न्यास बोर्ड का दावा है कि वर्तमान में प्रदेश में केवल 4600 मंदिर पंजीकृत हैं। कई ऐसे बड़े मंदिर भी हैं जिन्हों अब तक अपना पंजीकरण नहीं करवाया है। घर में बने किसी मंदिर में अगर केवल उसी घर के सदस्य पूजा करते हैं तो उसे निजी मंदिर माना जाएगा और उसे पंजीकरण या कर चुकाने के नियम का पालन नहीं करना होगा।

विस्तार

बिहार के धार्मिक न्यास बोर्ड ने प्रदेश में मंदिरों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब सभी सार्वजनिक मंदिरों को अपना पंजीकरण कराना होगा और कर भी चुकाना होगा। मंदिरों के लिए कर की दर चार फीसदी तय की गई है। इसके दायरे में वो मंदिर भी आएंगे जिसे किसी व्यक्ति ने अपने घर में बनवाया होगा और सबके लिए खुला होगा। 

बोर्ड ने मंदिरों के पंजीकरण के लिए एक दिसंबर के एक विशेष अभियान चलाने का फैसला लिया है। बोर्ड से राज्य के सभी जिले के कलेक्टरों से बिना पंजीकरण संचालित हो रहे सभी मंदिरों की जानकारी मांगी है। बोर्ड के अनुसार जैसे ही जिलों से ऐसे मंदिरों की जानकारी मिल जाएगी पंजीकरण का काम शुरू कर दिया जाएगा।

भोजपुर जिले ने उपलब्ध कराई मंदिरों की जानकारी

भोजपुर जिले के कलेक्टर ने ऐसे मंदिरों की जानकारी उपलब्ध करा दी है। बोर्ड के सदस्य और महंत विजय शंकर गिरि ने कहा कि स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है कि सभी मंदिर जहां लोग प्रार्थना करने जाते हैं है वह पूजा का सार्वजनिक स्थान माना जाएगा। फिर भले ही वह मंदिर किसी घर में ही क्यों न हो। ऐसे सभी मंदिरों को कर देना होगा।

बिहार में केवल 4600 मंदिरों का ही हुआ पंजीकरण

धार्मिक न्यास बोर्ड का दावा है कि वर्तमान में प्रदेश में केवल 4600 मंदिर पंजीकृत हैं। कई ऐसे बड़े मंदिर भी हैं जिन्हों अब तक अपना पंजीकरण नहीं करवाया है। घर में बने किसी मंदिर में अगर केवल उसी घर के सदस्य पूजा करते हैं तो उसे निजी मंदिर माना जाएगा और उसे पंजीकरण या कर चुकाने के नियम का पालन नहीं करना होगा।


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