Physical Hearing Started In All Seven District Courts Including Delhi High Court – दिल्ली: हाईकोर्ट सहित सभी सात जिला अदालतों में सशर्त फिजिकल सुनवाई शुरू, कोविड प्रोटोकॉल का करना होगा पालन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 23 Nov 2021 12:29 AM IST

सार

एसओपी के अनुसार फ्लू, बुखार, खांसी आदि के लक्षण प्रदर्शित करने वाले व्यक्तियों को अदालत परिसर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

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हाईकोर्ट सहित सभी सात जिला अदालतों में सशर्त फिजिकल सुनवाई शुरू हो गई। कोविड माहामारी के चलते प्रतिबंधति आधार पर सुनवाई की जा रही थी। हाईब्रिड सिस्टम को जारी रखते हुए सोमवार से सभी जजों ने फिजिकल सुनवाई शुरू कर दी।

उच्च न्यायालय कोविड -19 के प्रकोप के बाद मार्च 2020 से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही कर रहा है। बाद में कुछ पीठों ने रोटेशन के आधार पर रोजाना फिजिकल अदालतें आयोजित करना शुरू कर दिया। जज अभी भी कुछ उन मामलो में हाइब्रिड कार्यवाही के जरिए सुनवाई कर रहे है जिसमें वकीलों के पास व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने का विकल्प ले रहे है।

18 नवंबर को उच्च न्यायालय ने अदालत में वकीलों और वादियों के प्रवेश को विनियमित करने के लिए अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी और कहा कि फ्लू, बुखार और खांसी के लक्षण प्रदर्शित करने वालों को अनुमति नहीं दी जाएगी।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार मनोज जैन ने स्पष्ट किया कि किसी भी वादी, जिसका प्रतिनिधित्व एक वकील द्वारा किया जाता है, को तब तक प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि कोई विशिष्ट निर्देश न हो। इसमें यह भी कहा गया है कि उच्च न्यायालय आने वालों को सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों का सख्ती से पालन करना होगा और हर समय मास्क पहनना होगा।

अदालत में एक वकील व उसके जूनियर को जाने की अनुमति होगी। अदालत में वकीलों के कर्लक को अनुमति नहीं है लेकिन अत्याधिक फाइलें होने पर ही उसे फाइल पंहुचाने व उसके बाद फाइले वापस लेने के लिए ही अदालत में जाने की अनुमति होगी।

अदालत में किसी भी वकील व उसके मुवक्किल को सुनवाई के दौरान ही जाने की अनुमति होगी और मुवक्किल के रिस्तेदार व जानकार को जाने की इजाजत नहीं है। एसओपी ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिवक्ता, पार्टी-इन-पर्सन और 65 वर्ष से अधिक उम्र के पंजीकृत क्लर्क और सह-रुग्णता से पीड़ित लोग अदालतों में शारीरिक रूप से पेश होने से परहेज कर सकते हैं।

एसओपी के अनुसार फ्लू, बुखार, खांसी आदि के लक्षण प्रदर्शित करने वाले व्यक्तियों को अदालत परिसर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। 29 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने कहा था कि वह 22 नवंबर से पूर्ण शारीरिक सुनवाई फिर से शुरू करेगा, जबकि पार्टियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मोड के लिए अनुरोध करने का विकल्प देना जारी रखेगा।

एक बार मामला खत्म हो जाने के बाद अधिवक्ता व संबंधित पार्टी तुरंत अदालत परिसर को छोड़ देंगे। वकीलों के कक्ष अलग-अलग तरीके से खुले रहेंगे और केयरटेकिंग, हाउसकीपिंग स्टाफ अदालत भवनों की गहरी सफाई और पूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित करेगा।

विस्तार

हाईकोर्ट सहित सभी सात जिला अदालतों में सशर्त फिजिकल सुनवाई शुरू हो गई। कोविड माहामारी के चलते प्रतिबंधति आधार पर सुनवाई की जा रही थी। हाईब्रिड सिस्टम को जारी रखते हुए सोमवार से सभी जजों ने फिजिकल सुनवाई शुरू कर दी।

उच्च न्यायालय कोविड -19 के प्रकोप के बाद मार्च 2020 से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही कर रहा है। बाद में कुछ पीठों ने रोटेशन के आधार पर रोजाना फिजिकल अदालतें आयोजित करना शुरू कर दिया। जज अभी भी कुछ उन मामलो में हाइब्रिड कार्यवाही के जरिए सुनवाई कर रहे है जिसमें वकीलों के पास व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने का विकल्प ले रहे है।

18 नवंबर को उच्च न्यायालय ने अदालत में वकीलों और वादियों के प्रवेश को विनियमित करने के लिए अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी और कहा कि फ्लू, बुखार और खांसी के लक्षण प्रदर्शित करने वालों को अनुमति नहीं दी जाएगी।

हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार मनोज जैन ने स्पष्ट किया कि किसी भी वादी, जिसका प्रतिनिधित्व एक वकील द्वारा किया जाता है, को तब तक प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक कि कोई विशिष्ट निर्देश न हो। इसमें यह भी कहा गया है कि उच्च न्यायालय आने वालों को सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों का सख्ती से पालन करना होगा और हर समय मास्क पहनना होगा।

अदालत में एक वकील व उसके जूनियर को जाने की अनुमति होगी। अदालत में वकीलों के कर्लक को अनुमति नहीं है लेकिन अत्याधिक फाइलें होने पर ही उसे फाइल पंहुचाने व उसके बाद फाइले वापस लेने के लिए ही अदालत में जाने की अनुमति होगी।

अदालत में किसी भी वकील व उसके मुवक्किल को सुनवाई के दौरान ही जाने की अनुमति होगी और मुवक्किल के रिस्तेदार व जानकार को जाने की इजाजत नहीं है। एसओपी ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिवक्ता, पार्टी-इन-पर्सन और 65 वर्ष से अधिक उम्र के पंजीकृत क्लर्क और सह-रुग्णता से पीड़ित लोग अदालतों में शारीरिक रूप से पेश होने से परहेज कर सकते हैं।

एसओपी के अनुसार फ्लू, बुखार, खांसी आदि के लक्षण प्रदर्शित करने वाले व्यक्तियों को अदालत परिसर के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। 29 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने कहा था कि वह 22 नवंबर से पूर्ण शारीरिक सुनवाई फिर से शुरू करेगा, जबकि पार्टियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मोड के लिए अनुरोध करने का विकल्प देना जारी रखेगा।

एक बार मामला खत्म हो जाने के बाद अधिवक्ता व संबंधित पार्टी तुरंत अदालत परिसर को छोड़ देंगे। वकीलों के कक्ष अलग-अलग तरीके से खुले रहेंगे और केयरटेकिंग, हाउसकीपिंग स्टाफ अदालत भवनों की गहरी सफाई और पूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित करेगा।


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