Delhi: Dmrc Launches Prototype Of Fully Indigenous Driver Training System, The Road To Metro Will Be Easier – दिल्ली: डीएमआरसी ने पूर्ण स्वदेशी चालक प्रशिक्षण प्रणाली का प्रोटोटाइप लांच किया, मेट्रो की राह होगी और आसान

सार

सुपर सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन (स्काडा) सिस्टम के तहत परिचालन को आगे बढ़ाने के लिए की गई इस प्रोटोटाइप का केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव और डीएमआरसी के अध्यक्ष दुर्गा शंकर मिश्रा ने किया। इस मौके पर डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. मंगू सिंह, डीएमआरसी और बीईएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुपर स्काडा सिस्टम के प्रदर्शन को देखा।

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मेट्रो के परिचालन में इस्तेमाल होने वाली तकनीक की दिशा में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने एक और कदम बढ़ाया है। स्वदेशीकरण की तरफ कदम बढ़ाते हुए दिल्ली मेट्रो ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बेल) के सहयोग से सोमवार को रोलिंग स्टॉक ड्राइवर ट्रेनिंग सिस्टम (आरएसडीटीएस) के प्रोटोटाइप को लांच किया।

सुपर सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन (स्काडा) सिस्टम के तहत परिचालन को आगे बढ़ाने के लिए की गई इस प्रोटोटाइप का केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव और डीएमआरसी के अध्यक्ष दुर्गा शंकर मिश्रा ने किया। इस मौके पर डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. मंगू सिंह, डीएमआरसी और बीईएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुपर स्काडा सिस्टम के प्रदर्शन को देखा।

मेक इन इंडिया पहल के तहत आरएसडीटीएस के विकास के लिहाज से पिछले साल सितंबर में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह सिस्टम मेट्रो ओर रेलवे के ड्राइवरों की ट्रेनिंग में बेहद उपयोगी साबित होगा। सुरक्षा के लिहाज से जरूरत के मुताबिक ट्रेन ऑपरेटर के ड्राइविंग कौशल का भी मूल्यांकन किया जा सकेगा। यह पूर्ण तौर पर देश में विकसित पहला यूनिवर्सल ट्रेन ड्राइविंग सिम्युलेटर होगा। इसे किसी भी मेट्रो या रेलवे प्रणाली के लिए उपयोग के मुताबिक तैयार किया जा सकता है।

अभी विदेशों से होता था आयात
अभी तक डीएमआरसी विदेश से इन उत्पादों को आयात कर रही थी। इसपर उच्च लागत होती थी, लेकिन स्वदेशी उत्पाद के तैयार होने से अब मुश्किलें कम हो जाएंगी। डीएमआरसी के पास फिलहाल मौजूद रोलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग और ट्रैक सिस्टम के एकल इस्तेमाल के लिए उपयुक्त हैं। इसके बाद इनमें बदलाव करना अधिक खर्चीला है।

किफायती भी है यह सिस्टम
देश में ही विकसित आरएसडीटीएस में ऐसे कोर सॉफ्टवेयर की सुविधा है जिसका उपयोग रोलिंग स्ट़ॉक, सिगनलिंग और लाइन प्रोफाइल्स के लिए एक साथ किया जा सकता है। इसमें ड्राइविंग डेस्क की जरूरत के मुताबिक बदलाव किए जा सकते हैं। इससे प्रशिक्षण प्रणाली को लचीलापन मिलने के साथ साथ किफायती भी होगा। इसका उपयोग अलग अलग स्टॉक और रूटों के लिए किया जाएगा। यह उत्पाद मेट्रो और रेलवे के लिए उपयोगी होगा, क्योंकि अधिकांश मेट्रो संगठन ट्रेन ड्राइविंग को आउटसोर्स करने चाहते हैं। ऐसे में ड्राइविंग सिम्युलेटर की आसान उपलब्धता से सहूलियतें काफी बढ़ेंगी और इसकी वैश्विक स्तर पर आपूर्ति भी की जा सकेगी।

एएफसी, लिफ्ट और एस्केलेटर का परिचालन भी होगा आसान
फिलहाल सुपर-स्काडा के पहले चरण में तीन सिस्टम यानि ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन, लिफ्ट और एस्केलेटर तथा रोलिंग स्टॉक के व्हील मॉनिटरिंग सिस्टम को शामिल किया गया है। इसे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के लिहाज से विकसित किया जा रहा है ताकि भविष्य की जरूरतें पूरी हो सके। प्रबंधन के अलग-अलग स्तर के लिए भी एक नई प्रणाली विकसित की जा रही है। इससे निर्णय लेने में सहयोग मिलेगा और ट्रेनों के परिचालन के साथ साथ जुड़ी सभी सुविधाएं और आसान हो जाएंगी।

विस्तार

मेट्रो के परिचालन में इस्तेमाल होने वाली तकनीक की दिशा में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने एक और कदम बढ़ाया है। स्वदेशीकरण की तरफ कदम बढ़ाते हुए दिल्ली मेट्रो ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बेल) के सहयोग से सोमवार को रोलिंग स्टॉक ड्राइवर ट्रेनिंग सिस्टम (आरएसडीटीएस) के प्रोटोटाइप को लांच किया।

सुपर सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन (स्काडा) सिस्टम के तहत परिचालन को आगे बढ़ाने के लिए की गई इस प्रोटोटाइप का केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव और डीएमआरसी के अध्यक्ष दुर्गा शंकर मिश्रा ने किया। इस मौके पर डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. मंगू सिंह, डीएमआरसी और बीईएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुपर स्काडा सिस्टम के प्रदर्शन को देखा।

मेक इन इंडिया पहल के तहत आरएसडीटीएस के विकास के लिहाज से पिछले साल सितंबर में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह सिस्टम मेट्रो ओर रेलवे के ड्राइवरों की ट्रेनिंग में बेहद उपयोगी साबित होगा। सुरक्षा के लिहाज से जरूरत के मुताबिक ट्रेन ऑपरेटर के ड्राइविंग कौशल का भी मूल्यांकन किया जा सकेगा। यह पूर्ण तौर पर देश में विकसित पहला यूनिवर्सल ट्रेन ड्राइविंग सिम्युलेटर होगा। इसे किसी भी मेट्रो या रेलवे प्रणाली के लिए उपयोग के मुताबिक तैयार किया जा सकता है।


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