Dastan E Shahadat Open For People From Today – श्री चमकौर साहिब: आज से खुला दास्तान-ए-शहादत, 11 गैलरियों में दर्शाया गया सिख इतिहास, रूबरू होंगे सैलानी

संवाद न्यूज एजेंसी, श्री चमकौर साहिब (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 22 Nov 2021 11:10 AM IST

सार

पंजाब के श्री चमकौर साहिब में बना दास्तान-ए-शहादत को खोल दिया गया है। अब लोग इस विशाल म्यूजियम में जा सकते हैं। इसमें 11 गैलरियों का निर्माण किया गया है। एक बार में एक गैलरी में 40 सैलानियों के प्रवेश की अनुमति होगी। म्यूजियम में सिख इतिहास को दर्शाया गया है। 

दास्तान-ए-शहादत
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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श्री चमकौर साहिब में सिख इतिहास को दर्शाने वाले दास्तान-ए-शहादत को सोमवार 22 नवंबर से आम सैलानियों के लिए खोल दिया गया। राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने श्री गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व के मौके पर दास्तान-ए-शहादत का उद्घाटन किया था। 

डिप्टी कमिश्नर ने बताया मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की हिदायतों के अनुसार विशेष मुख्य सचिव सैर सपाटा और सांस्कृतिक विभाग संजय कुमार और डायरेक्टर कंवलप्रीत कौर बराड़ की तरफ से जारी दिशा निर्देशों अनुसार सोमवार सुबह 10 बजे से दास्तान -ए -शहादत को आम सैलानियों के लिए खोल दिया गया। यहां आने वाले सैलानियों को 40-40 के ग्रुप में प्रवेश दिया जाएगा। एक बार में 40 सैलानी एक गैलरी में जा सकेंगे। दास्तान-ए-शहादत में 11 गैलरियां हैं। इस तरह एक समय में 440 सैलानी दास्तान-ए-शहादत को देख सकेंगे। 

विरासत-ए-खालसा से की जा रही तुलना
गौरतलब है कि दास्तान-ए-शहादत को श्री आनंदपुर साहिब में बने विरासत-ए-खालसा के साथ मिलाकर देखा जा रहा है। इसकी तुलना विरासत-ए- खालसा से की जा रही है। श्री चमकौर साहिब के ऐतिहासिक गुरुद्वारों को आपस में जोड़ती इस हेरिटेज स्ट्रीट में सभी दुकानों को एक ही रंग में रंगा गया है और यह स्ट्रीट अमृतसर साहिब में बनाए गए विरासती मार्ग की तर्ज पर बनाई गई है। उम्मीद है कि इस विशाल म्यूजियम के बनने के बाद ऐतिहासिक धरती श्री चमकौर साहब में सैलानियों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इससे स्थानीय लोगों को अधिक रोजगार हासिल होगा।

गैलरियों में फिल्माया गया है सिख धर्म का इतिहास
यहां बनाईं गईं 11 गैलरियों में आधुनिक तरीके के साथ फिल्माए गए सिख धर्म के इतिहास को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयत्न किया गया है। पहली पातशाही श्री गुरुनानक देव जी के जीवन से लेकर दस गुरु साहिबानों के जीवन और भाई जैता जी की तरफ से श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के लाए गए शीश के दृश्यों को फिल्माया गया है। दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादे और सिंहों की शहादतों के बाद बाबा बंदा सिंह बहादुर की तरफ से सरहिंद पर की गई फतेह के दृश्य भी इन गैलरियों में दिखाया गया है।

विस्तार

श्री चमकौर साहिब में सिख इतिहास को दर्शाने वाले दास्तान-ए-शहादत को सोमवार 22 नवंबर से आम सैलानियों के लिए खोल दिया गया। राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने श्री गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व के मौके पर दास्तान-ए-शहादत का उद्घाटन किया था। 

डिप्टी कमिश्नर ने बताया मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की हिदायतों के अनुसार विशेष मुख्य सचिव सैर सपाटा और सांस्कृतिक विभाग संजय कुमार और डायरेक्टर कंवलप्रीत कौर बराड़ की तरफ से जारी दिशा निर्देशों अनुसार सोमवार सुबह 10 बजे से दास्तान -ए -शहादत को आम सैलानियों के लिए खोल दिया गया। यहां आने वाले सैलानियों को 40-40 के ग्रुप में प्रवेश दिया जाएगा। एक बार में 40 सैलानी एक गैलरी में जा सकेंगे। दास्तान-ए-शहादत में 11 गैलरियां हैं। इस तरह एक समय में 440 सैलानी दास्तान-ए-शहादत को देख सकेंगे। 

विरासत-ए-खालसा से की जा रही तुलना

गौरतलब है कि दास्तान-ए-शहादत को श्री आनंदपुर साहिब में बने विरासत-ए-खालसा के साथ मिलाकर देखा जा रहा है। इसकी तुलना विरासत-ए- खालसा से की जा रही है। श्री चमकौर साहिब के ऐतिहासिक गुरुद्वारों को आपस में जोड़ती इस हेरिटेज स्ट्रीट में सभी दुकानों को एक ही रंग में रंगा गया है और यह स्ट्रीट अमृतसर साहिब में बनाए गए विरासती मार्ग की तर्ज पर बनाई गई है। उम्मीद है कि इस विशाल म्यूजियम के बनने के बाद ऐतिहासिक धरती श्री चमकौर साहब में सैलानियों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इससे स्थानीय लोगों को अधिक रोजगार हासिल होगा।

गैलरियों में फिल्माया गया है सिख धर्म का इतिहास

यहां बनाईं गईं 11 गैलरियों में आधुनिक तरीके के साथ फिल्माए गए सिख धर्म के इतिहास को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयत्न किया गया है। पहली पातशाही श्री गुरुनानक देव जी के जीवन से लेकर दस गुरु साहिबानों के जीवन और भाई जैता जी की तरफ से श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के लाए गए शीश के दृश्यों को फिल्माया गया है। दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादे और सिंहों की शहादतों के बाद बाबा बंदा सिंह बहादुर की तरफ से सरहिंद पर की गई फतेह के दृश्य भी इन गैलरियों में दिखाया गया है।


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